Politics · India Bureau
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को जनहित में फैसले रद्द करने की शक्ति
महाराष्ट्र सरकार ने मुख्यमंत्री को जनहित के नाम पर मंत्रियों के फैसलों को निरस्त करने की शक्ति प्रदान की है। यह कदम बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद आया है जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री को ऐसी स्वतंत्र शक्ति नहीं होने का निर्णय दिया गया था।
LSN India ·

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को अब जनहित में किसी मंत्री के निर्णय को समीक्षा करने और संशोधित करने की वैधानिक शक्ति दी गई है। यह नई व्यवस्था राज्य शासन की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव है।
यह प्रावधान तीन वर्ष पहले बॉम्बे उच्च न्यायालय के एक अहम फैसले के पश्चात आया है। न्यायालय ने तब माना था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास मौजूदा कानून के तहत किसी मंत्री के निर्णय को समीक्षा या संशोधित करने की स्वतंत्र शक्ति नहीं थी। इस आदेश के कारण शासन में कई व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न हुई थीं।
अब लागू किया गया नया प्रावधान मुख्यमंत्री को संवैधानिक रूप से जनहित की परिभाषा के अंतर्गत किसी भी मंत्रिस्तरीय निर्णय पर पुनर्विचार करने का अधिकार देता है। इससे राज्य प्रशासन में तेजी आने और जनहित को बेहतर संरक्षण मिलने की संभावना है।
राज्य सरकार का मानना है कि यह कदम प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगा और जनता के हितों की रक्षा सुनिश्चित करेगा। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवस्था मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट करने में मदद देगी।