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महाराष्ट्र में डीजे-मुक्त त्योहारों की मांग तेज, स्वास्थ्य को लेकर चिंता
महाराष्ट्र में उच्च ध्वनि स्तर वाले संगीत प्रणालियों से मुक्त त्योहारों की मांग तेज हो गई है। पुणे के कार्यकर्ताओं सहित सामाजिक नेताओं का मानना है कि ध्वनि प्रदूषण से जनता के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान होता है।
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महाराष्ट्र में पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को लेकर एक नई बहस शुरू हुई है। राज्य के विभिन्न मंत्रियों ने डीजे तथा उच्च शक्ति वाले लाउडस्पीकरों के बिना त्योहार मनाने का आह्वान किया है, जिससे त्योहारों के दौरान होने वाले ध्वनि प्रदूषण को कम किया जा सके।
पुणे के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता विद्यानंद बापट इस आंदोलन के अग्रदूत बन गए हैं। वे लंबे समय से उच्च डेसिबल ध्वनि प्रणालियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं जो त्योहार और समारोहों के दौरान व्यापक ध्वनि प्रदूषण का कारण बनती हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक शोर से श्रवण शक्ति में कमी, नींद में व्यवधान और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह समस्या अधिक गंभीर साबित होती है।
इस मुद्दे पर बढ़ती जागरूकता से राज्य में एक सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है। सामाजिक संगठन और नागरिक समूह ध्वनि प्रदूषण के नियमों को कड़ाई से लागू करने की मांग कर रहे हैं ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य संरक्षित रहे।