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अरुण फरेरा को गैरकानूनी हिरासत के लिए महाराष्ट्र देगा 2 लाख रुपये
बॉम्बे हाई कोर्ट ने अरुण फरेरा को 2011 में गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लेने और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए महाराष्ट्र सरकार को मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट का यह फैसला राज्य पुलिस की कार्रवाई में कानूनी खामियों को रेखांकित करता है।
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को अरुण फरेरा को 2 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अपने निर्णय में पाया कि 2011 में फरेरा को कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में लिया गया था।
हाई कोर्ट ने यह भी माना कि इस कार्रवाई से नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ था। कोर्ट के अनुसार, पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई संविधान के प्रावधानों के विरुद्ध थी जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानूनी सुरक्षा की गारंटी देते हैं।
यह निर्णय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अदालतों की भूमिका को दर्शाता है। ऐसे मामलों में क्षतिपूर्ति का प्रावधान सरकारी एजेंसियों को कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के लिए जवाबदेह बनाता है।
अदालत का यह आदेश महाराष्ट्र में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश माना जा रहा है कि वे भविष्य में सभी कानूनी प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करें।