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महाराष्ट्र: डेटा सेंटरों की महत्वाकांक्षा के पीछे बिजली संकट
महाराष्ट्र डेटा केंद्रों के विकास को लेकर तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसके पीछे आम जनता को बढ़ती बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। राज्य की विकास नीति में ऊर्जा संकट और जनहित के बीच गहरा अंतराल दिख रहा है।
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महाराष्ट्र सरकार सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को बढ़ावा देने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना में तेजी ला रही है, लेकिन इस प्रक्रिया में राज्य की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली पर गंभीर दबाव पड़ रहा है। डेटा सेंटर स्थापित करने की दौड़ में राज्य आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों में बिजली की कटौती में वृद्धि देख रहा है।
विद्युत वितरण कंपनियों के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले महीनों में महाराष्ट्र के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजली की सरबराहत में अनियमितता बढ़ी है। डेटा सेंटरों जैसी ऊर्जा-गहन सुविधाओं के लिए अतिरिक्त विद्युत आवंटन से साधारण उपभोक्ताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य की विद्युत आपूर्ति क्षमता वर्तमान माहौल में अपर्याप्त है। डेटा हब बनने की कोशिश में महाराष्ट्र को अपनी ऊर्जा अवसंरचना में महत्वपूर्ण निवेश करना होगा, अन्यथा यह विकास सामान्य नागरिकों की कीमत पर आएगा।
आवश्यकता इस बात की है कि विकास और जनसेवा दोनों को संतुलित किया जाए। सरकार को डेटा सेंटर परियोजनाओं के साथ-साथ विद्युत उत्पादन और वितरण में भी समानांतर रूप से निवेश करना चाहिए।