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महाराष्ट्र के शिक्षक रोज़ 5 किलोमीटर पैदल चलकर एक छात्र को पढ़ाते हैं
कोलहापुर जिले के दुर्गम इलाके में स्थित स्कूल तक पहुँचने के लिए जीवन मिठारी घने जंगल से होकर प्रतिदिन पाँच किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। शिक्षा के प्रति उनकी निष्ठा एक बिना सहारे के छात्र के जीवन में रोशनी ला रही है।
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महाराष्ट्र के कोलहापुर जिले में एक शिक्षक की असाधारण समर्पण की कहानी शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। जीवन मिठारी नाम के इस शिक्षक के लिए दूरदराज़ इलाकों में बिखरे हुए छात्रों तक पहुँचना महज़ एक ड्यूटी नहीं, बल्कि एक सामाजिक दायित्व है।
प्रतिदिन पाँच किलोमीटर की यात्रा करके मिठारी एक सुदूर स्कूल तक पहुँचते हैं जहाँ उन्हें मात्र एक छात्र को शिक्षा प्रदान करनी होती है। यह रास्ता घने जंगल से होकर गुज़रता है, जहाँ बरसात के मौसम में पहुँचना विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है। फिर भी, मिठारी किसी भी परिस्थिति में अपने छात्र के समक्ष उपस्थित होने में कभी विफल नहीं होते।
इस दुर्गम इलाके में बहुत से परिवार ग़रीबी और आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। शिक्षकों की अभाव और बुनियादी सुविधाओं की कमी से यहाँ की शिक्षा व्यवस्था कमज़ोर है। ऐसे में मिठारी का आना इस अकेले छात्र के लिए भविष्य की आशा जगाता है।
मिठारी का यह प्रयास न केवल एक बच्चे की शिक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि समर्पित शिक्षकों के बिना किसी भी शैक्षणिक लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता। उनकी मेहनत का फल यह है कि एक ऐसा छात्र जो शायद स्कूल छोड़ सकता था, आज भी शिक्षा ग्रहण कर रहा है।