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भारत के अधिकांश गिग वर्कर सरकारी योजनाओं से बाहर रहते हैं
ई-श्रम पोर्टल पर गिग वर्कर्स के पंजीकरण में वृद्धि हुई है, लेकिन यह विभिन्न राज्यों में असमान है। देश के लाखों असंगठित श्रमिकों तक सरकारी सहायता पहुंचना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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भारत के गिग वर्कर्स को सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन विभिन्न राज्यों में इस प्रक्रिया की गति में बहुत अंतर देखा जा रहा है। देश के कुल गिग और असंगठित श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी इस पोर्टल से जुड़ा नहीं है।
ई-श्रम पोर्टल का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को एकीकृत डेटाबेस में दर्ज करना है ताकि वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें। इसके बावजूद, कई क्षेत्रों में गिग वर्कर्स को पंजीकरण प्रक्रिया की जानकारी नहीं है या पंजीकरण में तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य स्तर पर पंजीकरण दरों में उल्लेखनीय अंतर है, जिससे संकेत मिलता है कि स्थानीय कार्यान्वयन में असामान्यताएं हैं। कुछ राज्यों ने बेहतर प्रचार और सहायता प्रदान की है, जबकि अन्य राज्यों में जागरूकता की कमी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को गिग वर्कर्स तक पहुंचने के लिए अधिक प्रयास करने होंगे, विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में। ई-श्रम पोर्टल की पहुंच बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों को मजबूत समन्वय की आवश्यकता है।