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38 वर्ष पुराने रेप केस में आरोपी को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरी किया
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तीन दशक से अधिक पुराने एक रेप और अपहरण मामले में आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं।
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में लगभग 38 वर्ष पुराने रेप और अपहरण मामले में आरोपी को निर्दोष घोषित कर दिया है। मेरठ की निचली अदालत द्वारा पहले सुभाष को दोषी ठहराकर सजा दी गई थी, लेकिन उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इस फैसले को पलट दिया है।
हाई कोर्ट के अनुसार, अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि के लिए सबूतों का मानक उच्च होना चाहिए और संदेह से परे साक्ष्य आवश्यक है।
यह मामला भारतीय न्याय प्रणाली में लंबित मामलों की एक बड़ी संख्या को दर्शाता है। दशकों पुराने मामलों पर फैसले न्यायिक प्रणाली की जटिलताओं और समय-सीमा संबंधी चुनौतियों को उजागर करते हैं।
इस निर्णय के साथ, आरोपी को पूर्ण मुक्ति मिल गई है और वह अब कानून के दृष्टि में पूरी तरह निर्दोष माना जाएगा।