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त्सुतोमु यामागुची: दोनों परमाणु बमबारियों से बचने वाला अकेला व्यक्ति

त्सुतोमु यामागुची ने अगस्त 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी दोनों परमाणु विस्फोटों को झेलने का असाधारण अनुभव किया। बाद में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए सशक्त आवाज उठाई।

LSN India · 4 September 2026

त्सुतोमु यामागुची: दोनों परमाणु बमबारियों से बचने वाला अकेला व्यक्ति

त्सुतोमु यामागुची की जीवन कथा मानव अस्तित्व की सीमा को परखने वाली एक असाधारण गाथा है। 1945 की गर्मियों में जापान पर गिराए गए दोनों परमाणु बमों के विरुद्ध वह अकेला जीवित रहा जिसने इन दोनों विनाशकारी घटनाओं को सीधे अनुभव किया।

6 अगस्त 1945 को यामागुची हिरोशिमा में उपस्थित था जब अमेरिकी बमवर्षकों ने शहर पर परमाणु बम गिराया। इस विस्फोट में हजारों लोग तत्काल मारे गए और भी अधिक संख्या में विकिरण के प्रभावों से जूझने लगे। यामागुची स्वयं गंभीर जलने और विकिरण के संपर्क में आए, लेकिन जीवित रहे।

मात्र तीन दिन बाद, 9 अगस्त को यामागुची नागासाकी शहर में थे जब दूसरा परमाणु बम गिरा। यह दुर्भाग्यपूर्ण संयोग उन्हें विश्व इतिहास में एक अनोखे स्थान पर ला खड़ा किया। वह दोनों हमलों के ध्वंसकारी प्रभावों का साक्षी बने और दोनों से ही बच निकले।

युद्धोत्तर काल में यामागुची ने अपनी दर्दनाक यादों को मानवता की सेवा में लगा दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मंच पर परमाणु हथियारों के विरुद्ध शक्तिशाली आवाज उठाई और परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए अक्लांत प्रयास किए। उनका संदेश परमाणु शस्त्रों की विभीषिका को दुनिया के समक्ष प्रस्तुत करता रहा और शांति की स्थापना के लिए मानवता को प्रेरित करता रहा।