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मणिपुर में जनगणना स्थगित: एनआरसी मांग और जातीय संघर्ष का सवाल
मणिपुर में जनगणना संचालन को स्थगित किया गया है, जिसके पीछे राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर से जुड़ी राजनीतिक मांगें हैं। एनआरसी समर्थक समूह इसे राज्य के चल रहे जातीय संकट से जोड़ते हैं।
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मणिपुर में जनगणना संचालन को स्थगित करने का निर्णय राज्य में व्याप्त राजनीतिक तनाव और जातीय विभाजन को दर्शाता है। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर विभिन्न समूहों के बीच जारी विवाद इस स्थगन का मुख्य कारण बनी हुई है। प्रशासनिक स्रोत मानते हैं कि मौजूदा सामाजिक माहौल जनगणना जैसे बड़े सर्वेक्षण के लिए अनुकूल नहीं है।
एनआरसी की मांग करने वाले समूहों का तर्क है कि पड़ोसी बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए यह कदम आवश्यक है। इन समूहों के अनुसार, नागरिकता के मुद्दों को सुलझाए बिना राज्य की जनसांख्यिकीय गणना पूर्ण नहीं मानी जा सकती। वे तर्क देते हैं कि प्रवास संबंधी समस्या राज्य में जातीय समीकरण को बिगाड़ रही है।
मणिपुर के जातीय संघर्ष का एनआरसी से गहरा संबंध है। राज्य में मैतेई, नाग और कुकी समुदायों के बीच सांप्रदायिक तनाव दशकों से चल रहा है। एनआरसी को लेकर विभिन्न समूहों के हित भिन्न हैं, और इसी कारण जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में विलंब हो रहा है।
इस स्थगन से राज्य की प्रशासनिक योजनाओं पर असर पड़ेगा। जनगणना डेटा शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, राज्य सरकार ने अभी तक स्पष्ट नहीं किया है कि जनगणना संचालन कब तक के लिए स्थगित रहेगी।