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मणिपुर में विभाजन रेखा: व्हाट्सएप पर दोस्त, जमीन पर दुश्मन
मणिपुर में सांप्रदायिक विभाजन इतना गहरा हो गया है कि एक ही इलाके में रहने वाले लोग डिजिटल माध्यम से तो मित्र बने रहते हैं, लेकिन जमीन पर वे एक-दूसरे के विरोधी बन जाते हैं। यह स्थिति प्रदेश के कई इलाकों में देखी जा रही है।
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मणिपुर के कई इलाकों में सांप्रदायिक तनाव ने एक अनोखी और विडंबनापूर्ण स्थिति पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को दोस्त बताने वाले पड़ोसी जब अपने घरों के बाहर निकलते हैं तो संदेह और दुश्मनी का माहौल उनके बीच छाया रहता है। इस विभाजन की तुलना सीमावर्ती इलाकों की भौगोलिक दीवारों से की जा रही है, जहां समुदायों के बीच का अंतराल लगातार बढ़ता जा रहा है।
प्रदेश में विगत महीनों से जारी सांप्रदायिक संघर्ष ने सामाजिक ताने-बाने को गहरे तक झकझोर दिया है। मणिपुर के विभिन्न इलाकों में लोग अपनी सुरक्षा को लेकर भयभीत रहते हैं और सांप्रदायिक आधार पर पड़ोसियों को संदेह की नजर से देखते हैं। हालांकि, डिजिटल दुनिया में वे अपने पुराने संबंधों को बनाए रखते हैं और व्हाट्सएप जैसे मंचों पर मैत्रीपूर्ण संदेश भेजते हैं।
इस विरोधाभास से मणिपुर की सामाजिक एकता के लिए गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं। जब तक व्यक्तिगत स्तर पर विश्वास और संवाद टूट जाता है, तब तक समुदायों के बीच वास्तविक सुलह-समझौता मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर शांति की पहलें और सामुदायिक संवाद के बिना, मणिपुर को इस विभाजन से उबारना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।