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मणिपुर में अफीम की खेती की जगह बांस की खेती का विस्तार
मणिपुर के पहाड़ी जिलों में अवैध अफीम की खेती को रोकने के लिए सरकार ने बांस के वृक्षारोपण का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किया है। तीन जिलों में 307 हेक्टेयर वन भूमि में से 255 हेक्टेयर में सफलतापूर्वक बांस के बागान स्थापित किए गए हैं।
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मणिपुर में नशीली फसलों पर नियंत्रण पाने के प्रयास में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के प्रमुख वन संरक्षक के अनुसार, तीन पहाड़ी जिलों में अफीम की खेती वाली 307 हेक्टेयर वन भूमि में से 255 हेक्टेयर में बांस के बागान सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। यह पहल अवैध पोस्ता की खेती को समाप्त करने और स्थानीय किसानों को वैकल्पिक आजीविका प्रदान करने का एक प्रमुख कदम है।
बांस की खेती न केवल अवैध पोस्ता के खतरनाक कारोबार को खत्म करने में मदद कर रही है, बल्कि यह क्षेत्र के पर्यावरण को भी पुनः स्वस्थ कर रही है। बांस तेजी से बढ़ने वाली फसल है और इसके विभिन्न वाणिज्यिक उपयोग हैं। स्थानीय समुदाय के लिए यह आर्थिक रूप से टिकाऊ विकल्प साबित हो सकता है।
हालांकि 307 हेक्टेयर में से अभी 255 हेक्टेयर में ही बांस के बागान लगाए गए हैं, लेकिन राज्य सरकार शेष भूमि पर भी इसी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस परियोजना को पहाड़ी क्षेत्रों में सामाजिक वानिकी का एक सफल मॉडल माना जा रहा है।