LSN News › India

World · India Bureau

चिकित्सा विज्ञापन: जनता के स्वास्थ्य के लिए छिपा हुआ खतरा

दवाओं और चिकित्सा सेवाओं के आक्रामक विज्ञापन से आम लोग भ्रमित हो रहे हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह प्रवृत्ति स्वास्थ्य संकट बढ़ा रही है।

LSN India · 17 October 2026

चिकित्सा विज्ञापन: जनता के स्वास्थ्य के लिए छिपा हुआ खतरा

चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ते विज्ञापन अभियान आम नागरिकों के स्वास्थ्य संबंधी निर्णयों को गलत दिशा दे रहे हैं। फार्मास्यूटिकल कंपनियों द्वारा प्रसारित विज्ञापन अक्सर अधूरी जानकारी देते हैं और संभावित दुष्प्रभावों को नजरअंदाज करते हैं। यह प्रवृत्ति उपभोक्ताओं को अनावश्यक दवाओं के सेवन के लिए प्रेरित कर रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि निर्देशित चिकित्सा विज्ञापन जनता में अस्वास्थ्यकर मनोविज्ञान विकसित कर रहे हैं। लोग अपनी समस्याओं को रोगों का रूप देने लगे हैं और तुरंत दवा लेना शुरू कर देते हैं। इससे एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

भारत में चिकित्सा विज्ञापनों के नियमन की व्यवस्था कमजोर है। विनियामक निकाय अक्सर झूठे या भ्रामक दावों के खिलाफ कार्रवाई करने में असफल रहते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को विज्ञापन नियमों को सख्त करना चाहिए और जनता को चिकित्सा साक्षरता प्रदान करनी चाहिए।

स्वास्थ्य संगठन मानते हैं कि केवल योग्य चिकित्सकों की सलाह पर ही दवाएं लेनी चाहिए। विज्ञापनों के आधार पर निर्णय लेना अक्सर हानिकारक साबित होता है। जनता को अपनी समझ विकसित करने और आलोचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।