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माताओं की खान-पान की आदतें बच्चों में नए खाने के प्रति अनिच्छा बढ़ाती हैं
राष्ट्रीय पोषण संस्थान के अध्ययन में पाया गया कि बचपन में खाने के प्रति नकारात्मक रवैया आहार विविधता को सीमित कर सकता है। बढ़ते बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका दीर्घकालीन प्रभाव पड़ सकता है।
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बचपन में खान-पान की आदतें बाद के जीवन पर गहरा असर डालती हैं। हाल के शोध में यह बात सामने आई है कि माताओं की खाने की प्रवृत्तियां और उनके भोजन कराने के तरीके बच्चों में नए खाने के प्रति अनिच्छा पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अध्ययन के अनुसार, जब बच्चों में अपरिचित या अनजान खाद्य पदार्थों को खाने के प्रति संकोच दिखता है, तो इससे उनके समग्र आहार में विविधता की कमी आ सकती है। यह प्रवृत्ति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि बचपन और किशोरावस्था वृद्धि के महत्वपूर्ण वर्ष होते हैं।
पोषण विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि संतुलित आहार में विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ शामिल होने चाहिए। जब बच्चे नए खाने से बचते हैं, तो आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि माता-पिता को बचपन से ही बच्चों को विविध खाद्य पदार्थों के साथ परिचित कराना चाहिए। बच्चों के लिए सकारात्मक खान-पान का वातावरण बनाने से उनमें स्वस्थ आहार संबंधी आदतें विकसित हो सकती हैं।