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राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर में दोबारा पंजीकरण की जरूरत को लेकर डॉक्टरों में सवाल
चिकित्सा पेशेवर तर्क दे रहे हैं कि उनका डेटा पहले से ही राज्य चिकित्सा परिषदों के पास मौजूद है। डॉक्टरों का मानना है कि दोबारा पंजीकरण की प्रक्रिया अनावश्यक और बोझिल है।
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देश भर के चिकित्सा पेशेवर राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर के लिए दोबारा पंजीकरण कराने की आवश्यकता पर सवाल उठा रहे हैं। डॉक्टरों का तर्क है कि उनकी सभी आवश्यक जानकारी और योग्यताओं का विवरण पहले से ही उनकी संबंधित राज्य चिकित्सा परिषदों के पास मौजूद है।
चिकित्सा समुदाय का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर एक केंद्रीय रजिस्टर बनाने के लिए अलग से पंजीकरण की प्रक्रिया व्यर्थ और समय की बर्बादी है। उनके अनुसार, राज्य चिकित्सा परिषदों के डेटाबेस को सीधे राष्ट्रीय रजिस्टर से जोड़ा जा सकता है।
डॉक्टरों का यह भी तर्क है कि इस तरह की दोहरी पंजीकरण प्रक्रिया से स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों पर अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ पड़ता है। वे सरकार से एक सुव्यवस्थित प्रणाली विकसित करने की मांग कर रहे हैं जो मौजूदा रिकॉर्ड का उपयोग करे।
चिकित्सा प्रतिष्ठानों के अधिकारियों का कहना है कि इस मुद्दे को सरकार और संबंधित चिकित्सा निकायों के बीच संवाद के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। इससे डॉक्टरों की प्रशासनिक जटिलताओं को कम किया जा सकेगा।