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मेघालय प्रतिनिधिमंडल ने माल्टा में प्रथम विश्व युद्ध के तीन गारो सैनिकों की कब्रें खोजीं
मेघालय के एक प्रतिनिधिमंडल ने माल्टा में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मारे गए गारो समुदाय के तीन सैनिकों की कब्रें चिन्हित की हैं। इससे पहले केवल खेव मराक की कब्र को ही 69वीं गारो लेबर कंपनी का ज्ञात कब्र माना जाता था।
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मेघालय के प्रतिनिधिमंडल को माल्टा स्थित एक कब्रिस्तान में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मारे गए गारो समुदाय के सदस्यों की तीन कब्रें मिली हैं। यह खोज भारतीय सेना के इतिहास और प्रथम विश्व युद्ध में भारतीय सैनिकों की भूमिका को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
इससे पहले केवल खेव मराक की कब्र को ही गारो समुदाय के 69वीं गारो लेबर कंपनी का एकमात्र ज्ञात कब्र माना जाता था। खेव मराक की मृत्यु 15 जून 1918 को हुई थी। इस बार की खोज से यह संकेत मिलता है कि इस कंपनी के अन्य सदस्यों की भी कब्रें माल्टा में मौजूद हैं।
गारो समुदाय मेघालय का एक प्रमुख समुदाय है जिसने प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटिश भारतीय सेना की ओर से सेवा की थी। 69वीं गारो लेबर कंपनी को विभिन्न यूरोपीय मोर्चों पर तैनात किया गया था। इस कंपनी के सदस्यों की स्मृति को सुरक्षित रखना और उन्हें स्वीकृति देना इतिहास के संरक्षण का महत्वपूर्ण अंश है।
यह खोज भारत और माल्टा के बीच ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करती है। मेघालय का यह प्रतिनिधिमंडल इन कब्रों को दस्तावेज़ित करने और उचित स्वीकृति सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है।