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अंटार्कटिका के पिघलते ग्लेशियर समुद्र में जहरीले पारा को बहा रहे हैं

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अंटार्कटिका के ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से जहरीले पारा (mercury) का समुद्र में रिसाव हो रहा है। यह खोज जलवायु परिवर्तन के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर परिणामों को उजागर करती है।

LSN India · 25 August 2026

अंटार्कटिका के पिघलते ग्लेशियर समुद्र में जहरीले पारा को बहा रहे हैं

हिंद महासागर क्षेत्र के लिए एक चिंताजनक खोज सामने आई है क्योंकि अंटार्कटिका के पिघलते ग्लेशियरों से जहरीले पारा का रिसाव हो रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि से बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे लंबे समय से जमी हुई पारा महासागरीय प्रणाली में प्रवेश कर रही है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रक्रिया समुद्री जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। पारा समुद्री खाद्य श्रृंखला में जमा होता है और मछलियों सहित समुद्री जीवों में विषाक्त हो सकता है। यह न केवल समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी अप्रत्यक्ष खतरा बन सकता है।

यह शोध वैश्विक जलवायु संकट की गंभीरता को रेखांकित करता है। अंटार्कटिका पृथ्वी पर सबसे ठंडा क्षेत्र है, लेकिन यहां भी तेजी से तापमान बढ़ रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के लिए तत्काल और व्यापक कदम उठाने की आवश्यकता है।

इस खोज के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय को समुद्री प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के मध्य संबंध पर गंभीरता से विचार करना होगा। दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को भी इन विकासों पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि वे हिंद महासागर से गहराई से जुड़े हुए हैं।