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मेटा ने बच्चों के दिमाग को 'शोषित' किया: अभियोजक
ओकलैंड की अदालत में उप महान्यायवादी ने मेटा पर आरोप लगाया कि सोशल मीडिया कंपनी ने जानबूझकर बच्चों के मस्तिष्क की कार्यप्रणाली का फायदा उठाया और उन्हें आदी बना दिया।
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कैलिफोर्निया की ओकलैंड अदालत में एक महत्वपूर्ण मुकदमे की शुरुआत में उप महान्यायवादी मेगन ओ'नील ने मेटा कंपनी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। अपने प्रारंभिक तर्कों में उन्होंने कहा कि यह सोशल मीडिया दिग्गज "जानबूझकर यह जानते हुए कि बच्चों के दिमाग कैसे काम करते हैं, उसका शोषण करती है।"
अभियोजक के अनुसार, मेटा ने अपने प्लेटफार्मों पर बच्चों को लंबे समय तक सक्रिय रखने के लिए तरीकों का इस्तेमाल किया। यह रणनीति विशेष रूप से किशोरों के बौद्धिक विकास और उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने के लिए डिजाइन की गई थी।
इस मुकदमे में सरकार ने यह स्थापित करने का प्रयास किया है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्मों ने नाबालिग उपयोगकर्ताओं को नुकसान पहुंचाने के लिए जानबूझकर व्यवहार संबंधी तकनीकों का उपयोग किया। यह केस डिजिटल प्लेटफार्मों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं को प्रतिबिंबित करता है।
मेटा के खिलाफ यह कार्रवाई प्रौद्योगिकी कंपनियों की जवाबदेही को लेकर चल रहे व्यापक कानूनी संघर्ष का हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस केस का परिणाम न केवल मेटा बल्कि पूरे डिजिटल माध्यम उद्योग के लिए महत्वपूर्ण होगा।