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मेट्रो रेलवे में सूक्ष्म जीवाणुओं का खतरा, यात्रियों को स्वास्थ्य जोखिम
शहरी मेट्रो प्रणालियों में रोगाणुओं और हानिकारक सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए संभावित खतरा बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये अदृश्य धमकियां प्रतिदिन हजारों लोगों को संक्रमण का शिकार बना सकती हैं।
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देश की मेट्रो रेल प्रणाली में सूक्ष्मजीवों की व्यापक मौजूदगी का मुद्दा सामने आया है। हैंडल, सीट और दरवाजों जैसी सार्वजनिक सतहें बैक्टीरिया और वायरस के संचरण के प्रमुख माध्यम बन गई हैं। स्वच्छता विशेषज्ञों के अनुसार, भीड़-भाड़ वाली परिवहन व्यवस्था में रोगाणु तेजी से फैलते हैं।
ये सूक्ष्मजीव विभिन्न संक्रामक रोगों का कारण बन सकते हैं। श्वसन संबंधी संक्रमण, त्वचा रोग और पाचन संबंधी समस्याएं मेट्रो में संपर्क के माध्यम से फैलती हैं। विशेषकर बुजुर्ग, बच्चे और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग इन रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ यात्रियों को नियमित हाथ धुलाई और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। मेट्रो प्राधिकरण से सार्वजनिक स्थानों की अधिक बार सफाई और कीटाणुशोधन की मांग उठी है। उचित स्वच्छता प्रोटोकॉल अपनाकर इन जीवाणुजन्य खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।