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यूएई के समुद्री सांपों में माइक्रोप्लास्टिक्स का व्यापक प्रसार
यूएई के तटीय क्षेत्रों में किए गए एक अध्ययन में छह प्रजातियों के समुद्री सांपों के 95 प्रतिशत नमूनों में माइक्रोप्लास्टिक्स की मौजूदगी पाई गई है। यह खोज समुद्री जीवन पर प्लास्टिक प्रदूषण के बढ़ते खतरे को उजागर करती है।
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संयुक्त अरब अमीरात में संचालित एक व्यापक पर्यावरणीय अध्ययन में चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि यूएई के समुद्री इलाकों में पाई जाने वाली छह प्रजातियों के समुद्री सांपों में से 95 प्रतिशत के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक्स मौजूद हैं।
यह अध्ययन दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया की समुद्री जैव विविधता के लिए एक गंभीर चेतावनी है। माइक्रोप्लास्टिक्स छोटे प्लास्टिक कणों को कहा जाता है जो प्लास्टिक कचरे के टूटने से बनते हैं। ये कण समुद्री खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर जाते हैं और समुद्री जीवों के शरीर में जमा हो जाते हैं।
अध्ययन में शामिल समुद्री सांपों की सभी छह प्रजातियां इस प्रदूषण से प्रभावित पाई गईं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि माइक्रोप्लास्टिक्स की समस्या समुद्री क्षेत्र में कितनी व्यापक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदूषण संपूर्ण हिंद महासागर क्षेत्र में एक गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा बन गया है।
यह शोध संयुक्त अरब अमीरात के समुद्री तटों पर प्लास्टिक कचरे की बड़ी मात्रा की उपस्थिति को दर्शाता है। समुद्री जीवों में माइक्रोप्लास्टिक्स के जमा होने से उनके स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।