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मध्य पूर्व संकट से भारतीय विमानन क्षेत्र प्रभावित, कुछ हवाई अड्डे अपवाद
मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण भारत के प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानों में गिरावट दर्ज की गई है। चेन्नई और हैदराबाद के हवाई अड्डों पर दो महीने की अवधि में लगभग 20 प्रतिशत तक संचालन में कमी आई है।
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मध्य पूर्व में चलने वाले संघर्ष का असर भारतीय विमानन क्षेत्र पर स्पष्ट दिख रहा है। हालांकि, सभी हवाई अड्डे समान रूप से प्रभावित नहीं हुए हैं और कुछ अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
चेन्नई और हैदराबाद के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। दोनों हवाई अड्डों पर पिछले दो महीनों में विमान संचालन में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट मध्य पूर्व के प्रति भारतीय यात्रियों और कार्गो परिवहन में आई मंदी को दर्शाती है।
विश्लेषकों के अनुसार, मध्य पूर्व के साथ भारत के मजबूत आर्थिक और लोगों से लोगों के संबंध के कारण यह क्षेत्र विमानन के लिए महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में प्रवासी भारतीयों की बड़ी संख्या और द्विपक्षीय व्यापार के कारण इस रूट पर महत्वपूर्ण यात्री और कार्गो यातायात होता है।
हालांकि, कुछ अन्य हवाई अड्डे इस संकट काल में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं। ये हवाई अड्डे विविध रूट नेटवर्क और स्थानीय मांग पर अधिक निर्भर हैं, जिससे उन्हें इस संकट से कम नुकसान हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति सामान्य होने में समय लगेगा और भारतीय विमानन उद्योग को अधिक लचीला नेटवर्क बनाने की आवश्यकता है।