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मध्यम शक्तियां तकनीकी गठबंधन से स्वायत्तता बनाए रखने का प्रयास करतीं

भारत जैसी मध्यम शक्तियां प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बहुपक्षीय सहयोग बढ़ा रहीं, लेकिन सवाल यह है कि ये प्रयास वास्तव में अमेरिका और चीन के प्रभाव से मुक्त रह पाएंगे।

LSN India · 12 October 2026

मध्यम शक्तियां तकनीकी गठबंधन से स्वायत्तता बनाए रखने का प्रयास करतीं

क्षेत्रीय मध्यम शक्तियां अपनी स्वतंत्र नीति बनाए रखने के लिए प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नए लघु-बहुपक्षीय सहयोग के ढांचे तैयार कर रहीं। ये पहल महाशक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता के बीच अपनी राजनीतिक और आर्थिक स्वायत्तता को संरक्षित रखने के लिए डिजाइन किए गए हैं। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे गठबंधन की कार्यक्षमता और स्वतंत्रता के बारे में गंभीर सवाल उठते हैं।

प्रौद्योगिकी क्षेत्र में ये नए समूह अर्धचालक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। इन देशों का उद्देश्य वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखला में अधिक आत्मनिर्भरता हासिल करना है। लेकिन व्यावहारिक दृष्टि से, अधिकांश मध्यम शक्तियों का अमेरिकी और चीनी तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र पर महत्वपूर्ण निर्भरता बनी हुई है।

भू-राजनीतिक विश्लेषकों का तर्क है कि इस तरह के लघु-बहुपक्षीय समूहों को बड़ी शक्तियों के दबाव से पूरी तरह अलग रहना मुश्किल साबित हो सकता है। व्यापार, निवेश और सुरक्षा समझौतों के जाल में ये देश अपनी स्वतंत्र रणनीति को लागू करने में बाधाओं का सामना कर सकते हैं। इसके बावजूद, क्षेत्रीय सहयोग की ये पहल मध्यम शक्तियों की बढ़ती आकांक्षाओं को दर्शाती है कि वे विश्व व्यवस्था में एक स्वतंत्र भूमिका निभा सकें।