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एक लाख का क्रेडिट कार्ड बिल: न्यूनतम राशि चुकाने के खतरे
क्रेडिट कार्ड बिल पर केवल न्यूनतम देय राशि का भुगतान करने से उच्च ब्याज शुल्क और लंबी अवधि तक कर्ज का बोझ बना रह सकता है। विशेषज्ञ पूरी राशि चुकाने की सलाह देते हैं।
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क्रेडिट कार्ड के न्यूनतम देय विकल्प का उपयोग अक्सर तत्काल राहत प्रदान करता दिखाई देता है, लेकिन एक लाख रुपये जैसी बड़ी राशि पर यह निर्णय दीर्घकालीन आर्थिक समस्या का कारण बन सकता है। जब कोई ग्राहक केवल न्यूनतम राशि का भुगतान करता है, तो शेष बकाया पर ब्याज दरें लागू होने लगती हैं, जो आमतौर पर सालाना 36 से 42 प्रतिशत तक होती हैं।
न्यूनतम भुगतान विकल्प का चयन करने से ब्याज-मुक्त अवधि का लाभ भी खत्म हो जाता है। अधिकांश क्रेडिट कार्ड धारकों को जब तक बकाया पूरी तरह से न चुकाया जाता, तब तक की गई नई खरीद पर भी ब्याज लगने लगता है। इस प्रकार, प्रारंभिक एक लाख रुपये का बिल जल्द ही कहीं अधिक राशि में तब्दील हो सकता है।
उदाहरण के लिए, एक लाख रुपये के बिल पर 40 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर मानने पर, महीना दर महीना ब्याज की रकम काफी अधिक हो जाती है। यदि कोई केवल न्यूनतम राशि का भुगतान करता रहे, तो पूरे कर्ज को समाप्त करने में कई वर्षों लग सकते हैं।
वित्तीय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि संभव हो तो क्रेडिट कार्ड बिल की पूरी राशि समय पर चुकानी चाहिए। अगर तत्काल रूप से पूरा भुगतान करना संभव न हो, तो कम से कम न्यूनतम राशि से अधिक की किस्त देने का प्रयास करना चाहिए। इससे मूलधन पर लगने वाले ब्याज को नियंत्रित रखा जा सकता है और कर्ज से तेजी से मुक्ति मिल सकती है।