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मिनेसोटा के छात्र ने टी बैग से बनाया सस्ता आर्सेनिक फिल्टर
एक अभिनव तकनीक में, अमेरिकी छात्र ने अंडे के छिलके और चुंबकीय आयरन ऑक्साइड से बना एक टी बैग विकसित किया है जो प्रदूषित जल से आर्सेनिक को 98 प्रतिशत तक हटा सकता है। यह सस्ती तकनीक विकासशील देशों में सुरक्षित पेयजल सुलभ कराने का रास्ता दिखाती है।
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एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि में, मिनेसोटा के एक छात्र ने आर्सेनिक प्रदूषण को दूर करने के लिए एक क्रांतिकारी फिल्टर तैयार किया है। यह फिल्टर सामान्य टी बैग के आकार का है और इसमें अंडे के छिलकों तथा चुंबकीय आयरन ऑक्साइड का उपयोग किया जाता है, जो प्रदूषित जल से हानिकारक आर्सेनिक को निकालने में सक्षम है।
प्रयोगशाला में किए गए कठोर परीक्षणों में यह उपकरण 98 प्रतिशत से अधिक आर्सेनिक को हटाने में सफल रहा है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी सरलता और किफायती प्रकृति है, जो इसे विकासशील देशों में व्यापक पैमाने पर लागू करने के लिए उपयुक्त बनाती है।
शोधकर्ता अब इस फिल्टर को दोबारा उपयोग करने की संभावना और इसके सस्ते पैमाने पर उत्पादन पर कार्य कर रहे हैं। यह नवाचार उन लाखों लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो आर्सेनिक-युक्त जल से प्रभावित क्षेत्रों में रहते हैं और सुरक्षित पेयजल तक पहुंचने में असमर्थ हैं।
आर्सेनिक एक विषैला तत्व है जो भूजल में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है और लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से कैंसर और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इस प्रकार की सस्ती और प्रभावी तकनीकें विश्व के कई क्षेत्रों में जल शुद्धिकरण की समस्या का समाधान प्रदान कर सकती हैं।