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भारत में नकली खबरों का प्रसार, चीन-पाकिस्तान की साइबर रणनीति का संदेह
नियंत्रण रेखा पर तनाव के बीच भारत में जाली सूचनाओं और भ्रामक प्रचार का प्रसार बढ़ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह चीन और पाकिस्तान की समन्वित संचार रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
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नियंत्रण रेखा के आस-पास की सैन्य गतिविधियों की रिपोर्टों के बीच भारत में नकली खबरों और भ्रामक सूचनाओं की एक लहर दैखी जा रही है। सूचना विश्लेषकों के अनुसार, इन जाली सामग्रियों की व्यापक उपस्थिति से पता चलता है कि कोई सुसंगठित प्रयास भारतीय जनता में भ्रम और असंतोष फैलाने की कोशिश कर रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भारतीय सुरक्षा बलों, राजनीतिक नेतृत्व और सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़ी दर्जनों भ्रामक पोस्ट्स वायरल हुई हैं। इन सामग्रियों में युद्ध संबंधी अफवाहें, हताहत संख्याओं के बारे में गलत दावे और सरकारी नीतियों के विरुद्ध भावनात्मक अपीलें शामिल हैं।
डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि पड़ोसी देशों द्वारा भारत के राजनीतिक और सामाजिक स्थিरता को प्रभावित करने के लिए मनोवैज्ञानिक संचार संचालन (साइकोलॉजिकल ऑपरेशन) चलाए जा रहे हैं। ऐसी रणनीति सूचना अंतराल का लाभ उठाती है और विश्वसनीय स्रोतों के प्रति संदेह पैदा करती है।
भारतीय साइबर सुरक्षा एजेंसियां इन नकली सामग्रियों की पहचान और उन्हें प्रसारित करने वाले नेटवर्क्स को ट्रैक करने के लिए काम कर रही हैं। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सूचनाओं की पुष्टि करें और अविश्वसनीय स्रोतों से सामग्री साझा न करें।