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न्यायाधीशों को गलत तरीके से उद्धृत करना अपराध है: सर्वोच्च न्यायालय

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा है कि न्यायाधीशों के बयानों को गलत तरीके से प्रस्तुत करना अवमानना से अधिक गंभीर अपराध है। पीठ ने ऑनलाइन न्यायालय क्लिप में न्यायाधीशों के वक्तव्यों को विकृत करने पर कड़ी आपत्ति जताई।

LSN India · 16 September 2026

न्यायाधीशों को गलत तरीके से उद्धृत करना अपराध है: सर्वोच्च न्यायालय

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि न्यायाधीशों के बयानों को झूठा या गलत तरीके से प्रस्तुत करना केवल न्यायालय की अवमानना नहीं है, बल्कि यह एक दंडनीय अपराध है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने यह महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है।

पीठ ने कहा कि ऑनलाइन माध्यमों पर प्रसारित न्यायालय की कार्यवाही की क्लिप में न्यायाधीशों के शब्दों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना विशेष रूप से चिंताजनक है। इस तरह के कार्य न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुंचाते हैं और न्यायालय में जनता के विश्वास को कमजोर करते हैं।

न्यायाधीशों ने आगे कहा कि वकीलों द्वारा मौखिक बहस के दौरान दिए गए बयानों को भी गलतबयानी से प्रस्तुत करना गलत है। ऐसे कार्य न केवल न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं, बल्कि कानूनी व्यवस्था में भी संदेह पैदा करते हैं।

पीठ ने जोर दिया कि न्यायालय के फैसलों और कार्यवाहियों को सटीक और ईमानदारी से प्रस्तुत करना प्रत्येक नागरिक और मीडिया का दायित्व है। न्यायाधीशों ने सूचित किया कि इस तरह के उल्लंघन के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।