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दिवाली पूजा का मुहूर्त छूटा? जानिए आखिरी शुभ घड़ी के बारे में
दिवाली के प्रमुख मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन न कर सकने वाले भक्तों के लिए खुशखबरी है। पंचांग के अनुसार, शाम 5:31 से रात 10:27 तक अमृत काल में भी पूजा का विधान है।
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दिवाली की संध्या पर जो लोग निर्धारित मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन नहीं कर पाए, उनके लिए ज्योतिषीय गणना के अनुसार एक अतिरिक्त समय खिड़की उपलब्ध है। पंचांग विशेषज्ञों के अनुसार, दिवाली की शाम को 5 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर रात 10 बजकर 27 मिनट तक अमृत-चौघड़िया मुहूर्त विद्यमान रहेगा।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस अबूझ घड़ी को लक्ष्मी पूजन के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्त इस समयावधि में भी विधिवत रूप से देवी लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं और घर में सुख, समृद्धि तथा उन्नति के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।
ज्योतिष शास्त्र में इस अवधि को विशेष महत्व दिया गया है क्योंकि इसमें पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। परिवार के सभी सदस्यों को इस समय में लक्ष्मी देवी को अर्पित करना चाहिए और परिवार की समृद्धि के लिए भक्तिभाव से अनुष्ठान करना चाहिए।