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गोल्ड लोन की EMI चूकने पर गहने नीलाम हो सकते हैं, जानें नियम
गोल्ड लोन लेना आसान है, लेकिन किस्त न भरने पर बैंक गहनों को नीलाम कर सकता है। जानिए इस प्रक्रिया के नियम और अपने गहनों को बचाने के तरीके।
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आर्थिक संकट के समय सोना गिरवी रखकर लोन लेना एक सुविधाजनक विकल्प प्रतीत होता है। किंतु EMI की किस्त चूकने पर उधारकर्ताओं को गहनों के नीलाम होने का खतरा रहता है। बैंकिंग नियमों के अनुसार, सोने की गिरवी पर दिए गए लोन की शर्तों का पालन न करने पर वित्तीय संस्थान कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए संपत्ति को नीलाम कर सकते हैं।
आमतौर पर बैंक और एनबीएफसी एक या दो किस्तें चूकने के तुरंत बाद नीलामी की कार्रवाई शुरू नहीं करते। हालांकि, लगातार कई महीनों तक किस्त न भरने पर संस्था उधारकर्ता को लिखित सूचना देते हुए एक निर्धारित अवधि में बकाया राशि चुकाने का मौका देता है। इस समय सीमा के बाद यदि राशि जमा नहीं होती, तो नीलामी की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
गहने बचाने के लिए उधारकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि किस्त में कोई देरी होते ही बैंक से संपर्क करें और राशि चुकाने की योजना बनाएं। कई संस्थान कुछ शर्तों पर किस्त की अवधि बढ़ाने या दर में छूट देने के लिए तैयार रहते हैं। उधारकर्ता को अपने अधिकारों से संबंधित सभी दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए और किसी भी गिरवी समझौते की शर्तों को विस्तार से समझना चाहिए।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देश के अनुसार, वित्तीय संस्थानों को उधारकर्ताओं के साथ पारदर्शी और न्यायसंगत व्यवहार करना अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति अपने गहनों की नीलामी के विरुद्ध आपत्ति करना चाहे, तो वह बैंकिंग लोकपाल या संबंधित नियामक प्राधिकार के पास शिकायत दर्ज कर सकता है।