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रेल टिकट न मिलने से मुआवजे का दावा खारिज नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यात्री की मृत्यु के बाद टिकट न मिलना मुआवजे के दावे को कमजोर नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि माता-पिता द्वारा दावा दायर करने के बाद प्राधिकारियों ने जांच रिपोर्ट तैयार की।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि रेलवे द्वारा यात्री का टिकट न मिलना किसी भी परिस्थिति में मुआवजे के दावे को खारिज करने का आधार नहीं बन सकता। न्यायाधीशों की खंडपीठ ने माना कि टिकट की अनुपस्थिति पीड़ित की मृत्यु की सत्यता को प्रभावित नहीं कर सकती।
मामले की जांच में पाया गया कि मृतक यात्री के माता-पिता ने क्षतिपूर्ति प्राधिकरण के समक्ष दावा आवेदन दायर किया था। इसके पश्चात संबंधित रेलवे प्राधिकारियों ने आवश्यक जांच रिपोर्ट तैयार की। अदालत ने पाया कि यह रिपोर्ट दावे की प्रक्रिया के दौरान ही तैयार की गई थी।
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में प्रलेखन संबंधी कमियों को सर्वोत्तम साक्ष्य नहीं माना जा सकता। रेलवे द्वारा प्रदान किए गए अन्य दस्तावेज और साक्ष्य को दावे के मूल्यांकन में मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए।
यह निर्णय यात्रियों के अधिकारों की रक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय का यह दृष्टिकोण परिवारों को न्याय पाने के मार्ग को सुगम बनाता है, भले ही किसी कारणवश आवश्यक दस्तावेज तुरंत उपलब्ध न हों।