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मोदी का रणनीति: विभाजित विश्व में गठबंधन निर्माण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विदेश नीति दृष्टिकोण भारत को नियम-निर्माता के रूप में प्रतिष्ठित करने पर केंद्रित है। यह रणनीति वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका को केवल नियम का पालन करने से आगे ले जाना चाहती है।
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भारत की विदेश नीति में मोदी सरकार का दृष्टिकोण एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत देता है। पारंपरिक रूप से भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में एक नियम-पालक राष्ट्र रहा है, लेकिन सरकार अब भारत को नियम-निर्माता के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है। यह बदलाव भारत की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक शक्ति को प्रतिबिंबित करता है।
इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मोदी सरकार की रणनीति क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर गठबंधन निर्माण पर आधारित है। विभाजित और अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों में, भारत अपने हितों की रक्षा के लिए और प्रभाव बढ़ाने के लिए रणनीतिक साझेदारियों का निर्माण कर रहा है। ये गठबंधन भारत को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी नीतियों को प्रभावित करने की क्षमता प्रदान करते हैं।
भारत का यह नया दृष्टिकोण दक्षिण एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में इसकी भूमिका को मजबूत करता है। अन्य लोकतांत्रिक राष्ट्रों के साथ सहयोग के माध्यम से, भारत वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है। यह रणनीति भारत को न केवल अपने क्षेत्र में, बल्कि विश्व स्तर पर एक प्रभावशाली शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए डिज़ाइन की गई है।