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मोदी-पुतिन की एससीओ बैठक में द्विपक्षीय व्यापार पर फोकस, असंतुलन की समीक्षा
भारत और रूस के बीच व्यापार 2021 में 13 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 60 अरब डॉलर तक पहुंचा है, लेकिन व्यापार असंतुलन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।
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भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार में पिछले चार वर्षों में असाधारण वृद्धि देखी गई है। 2021 में जहां व्यापार मूल्य 13 अरब डॉलर था, वह 2025 में पांच गुना बढ़कर 60 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। यह वृद्धि ऊर्जा क्षेत्र में बढ़े हुए आयात और अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों का परिणाम है।
हालांकि, व्यापार में असंतुलन भी समान गति से बढ़ा है। 2021 में यह असंतुलन 6.6 अरब डॉलर था, जो वर्तमान में 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया है, जिसमें रूस का अधिशेष है। यह असंतुलन मुख्य रूप से भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता को दर्शाता है।
शंघाई सहयोग संगठन की आसन्न बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस व्यापार असंतुलन को संबोधित करने के तरीकों पर विचार करेंगे। दोनों पक्षों से अपेक्षा की जाती है कि वे व्यापार को अधिक संतुलित करने और भारतीय निर्यात को बढ़ाने के उपायों पर चर्चा करें।
द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता को स्वीकार किया है। इसमें निर्माण, प्रौद्योगिकी और कृषि जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जहां भारतीय निर्यात की संभावना है।