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मानसून घाटा घटा, खरीफ बुवाई में सुधार; फसल जोखिम सीमित
मानसून की वर्षा में कमी 16 जून को 35 प्रतिशत से घटकर 19 अगस्त तक 12.6 प्रतिशत रह गई है। इस सुधार से खरीफ फसलों की बुवाई में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
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देश में मानसूनी वर्षा की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। जून माह के मध्य में जहां कुल वर्षा में 35 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी, वहीं अगस्त के तीसरे सप्ताह तक यह घाटा घटकर मात्र 12.6 प्रतिशत पर आ गया है। यह सकारात्मक प्रवृत्ति कृषि क्षेत्र के लिए एक अच्छा संकेत माना जा रहा है।
वर्षा की उपलब्धता में इस सुधार का सीधा असर खरीफ मौसम की बुवाई पर पड़ा है। प्रारंभिक कमजोरी से उबरते हुए खरीफ फसलों की बुवाई में पर्याप्त सुधार दर्ज किया गया है। किसानों को बेहतर नमी की स्थिति मिलने से वे धान, दलहन और तिलहन की बुवाई को आगे बढ़ाने में सफल रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बिना प्रतिबंध विश्लेषकों की ओर से कहा जा रहा है कि मानसूनी स्थिति में यह सुधार आने वाले समय में फसल उत्पादन के जोखिम को सीमित करेगा। वर्तमान प्रवृत्ति से संकेत मिलता है कि खरीफ सीजन में समुचित उत्पादन की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ सप्ताह में भी वर्षा सामान्य रहे तो वर्षभर की खाद्य आपूर्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
मौसम विभाग की ओर से मानसून के पूरे मौसम में सामान्य रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है। यह स्थिति कृषि मंत्रालय और राज्य सरकारों को खरीफ उत्पादन संबंधी लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगी।