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शुक्रवार को चांद होगा पृथ्वी से सबसे दूर, ज्वार-भाटा पर असर
इस शुक्रवार को चांद अपनी कक्षा में पृथ्वी से सबसे दूर स्थिति में पहुंचेगा। इस दौरान ज्वार-भाटे की तीव्रता में कमी आएगी और चांद आकार में छोटा दिखाई देगा।
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इस शुक्रवार को चांद पृथ्वी से लगभग 403,945 किलोमीटर की दूरी पर होगा, जो उसकी कक्षा में सबसे दूर की स्थिति है। खगोल विज्ञान में इसे अपोजी या दूरबिंदु कहा जाता है। इस अवस्था में पृथ्वी के आकाश में चांद अपने सामान्य आकार से कुछ छोटा नजर आएगा।
इस स्थिति का पृथ्वी पर ज्वारीय गतिविधियों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। चूंकि चांद पृथ्वी से अधिक दूरी पर होगा, इसलिए महासागरों और समुद्रों में उठने वाले ज्वार-भाटे की तीव्रता में कमजोरी देखी जाएगी। सामान्य समय की तुलना में इस अवधि में ज्वार-भाटा अपेक्षाकृत कम प्रभावशाली होंगे।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि काल्पनिक रूप से चांद पृथ्वी से सदा के लिए दूर चला जाए, तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में पृथ्वी पर ज्वार-भाटे की गतिविधि न्यूनतम हो जाएगी। साथ ही, पृथ्वी का घूर्णन धीमा पड़ सकता है, जिससे दिन की अवधि में वृद्धि हो सकती है।