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मुंबई का प्रदूषण दिल्ली से भी बदतर, हाईकोर्ट ने दी कड़ी फटकार
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई में वायु और ध्वनि प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। अदालत ने बीएमसी, एमपीसीबी और पुलिस प्रशासन से तत्काल प्रभावी उपाय करने का आदेश दिया।
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई में बढ़ती प्रदूषण समस्या पर सख्त रुख अपनाते हुए नगर निकाय, पर्यावरण मंत्रालय और पुलिस विभाग को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) दिल्ली के स्तर तक पहुंच गया है, जो चिंताजनक है।
न्यायालय ने सरकारी अधिकारियों की निष्क्रियता को नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करार दिया। अदालत ने प्रश्न उठाया कि जब शहर का प्रदूषण इतना बढ़ गया है, तो जिम्मेदार अधिकारियों को चैन की नींद कैसे आ रही है। न्यायाधीश ने कहा कि यह स्थिति नागरिकों के स्वास्थ्य अधिकार के खिलाफ है।
हाई कोर्ट ने सभी संबंधित विभागों को तत्काल और व्यावहारिक कदम उठाने का निर्देश दिया है। अदालत ने प्रशासन से प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत करने और नियमित रिपोर्ट देने को कहा है।
अदालत ने जोर देते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण में केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। न्यायालय ने आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और समाज के सहयोग को आवश्यक बताया। साथ ही, अदालत ने प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न रहे।