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मुर्रा भैंस: दुग्ध उत्पादन में भारत की सर्वश्रेष्ठ नस्ल

मुर्रा नस्ल की भैंस अपनी उच्च दूध उत्पादन क्षमता और विशिष्ट शारीरिक विशेषताओं के लिए भारत में प्रसिद्ध है। इस नस्ल के पालन-पोषण और आर्थिक महत्व को समझना पशुपालकों के लिए आवश्यक है।

LSN India · 10 October 2026

मुर्रा भैंस: दुग्ध उत्पादन में भारत की सर्वश्रेष्ठ नस्ल

मुर्रा भैंस भारतीय पशुपालन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस नस्ल की भैंसें अपनी असाधारण दूध देने की क्षमता के कारण दुग्ध व्यवसाय में पहली पसंद मानी जाती हैं। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में मुर्रा नस्ल का व्यापक पालन किया जाता है।

इस नस्ल की पहचान उसके काले रंग, मजबूत बनावट और विशेष शारीरिक संरचना से होती है। मुर्रा भैंसें प्रतिदिन 15 से 20 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती हैं, जो अन्य नस्लों की तुलना में काफी अधिक है। इनकी लंबी दुग्ध अवधि और उच्च गुणवत्ता के दूध के कारण ये दूध उत्पादकों के लिए लाभदायक साबित होती हैं।

बाजार में मुर्रा भैंस की कीमत उसकी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और दूध देने की क्षमता पर निर्भर करती है। एक अच्छी गुणवत्ता की मुर्रा भैंस की कीमत एक लाख से लेकर कई लाख रुपये तक हो सकती है। पशुपालकों के लिए इनका रख-रखाव अपेक्षाकृत सरल है, परंतु पौष्टिक चारा और स्वच्छ वातावरण आवश्यक है।

मुर्रा भैंस के सफल पालन के लिए उचित आहार, नियमित पशु चिकित्सा सेवाएं और स्वास्थ्य जांच अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन भैंसों को गर्मी से बचाव और पर्याप्त जल की आपूर्ति भी सुनिश्चित करनी चाहिए। सही देखभाल के साथ एक मुर्रा भैंस 12 से 15 वर्षों तक उत्पादनशील रह सकती है और दूध उत्पादन में स्थिरता बनाए रख सकती है।