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भारत में स्टारलिंक को अनुमति न देने पर मस्क का सवाल, अमेरिका की द्वैध नीति
एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक को इंटरनेट सेवा प्रदान का लाइसेंस न दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। वहीं अमेरिका भी राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर विदेशी कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाता है।
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स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक को ब्रॉडबैंड सेवा प्रदान करने का लाइसेंस न देने पर अपनी असहमति जताई है। मस्क का तर्क है कि भारत सरकार इस सेवा को मंजूरी न देने में जो तर्क दे रही है, उसी तर्क का इस्तेमाल अमेरिका भी करता है, लेकिन अपने यहां विदेशी कंपनियों को प्रतिबंधित करने में।
अमेरिका सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए कई विदेशी कंपनियों के दूरसंचार उपकरणों, निगरानी कैमरों, एंटीवायरस सॉफ्टवेयर और सेमीकंडक्टर चिप्स को देश में इस्तेमाल नहीं करने देता। चीनी कंपनियों हुआवेई और जेडटीई पर तो लंबे समय से सख्त प्रतिबंध लगे हैं।
ये प्रतिबंध मुख्य रूप से सरकारी एजेंसियों और महत्वपूर्ण ढांचागत परियोजनाओं पर सबसे कठोर हैं। अमेरिका का तर्क है कि इन तकनीकों के माध्यम से गोपनीय सूचनाओं तक विदेशी हस्तक्षेप की आशंका रहती है।
भारत का रुख भी इसी सुरक्षा सिद्धांत पर आधारित है। सरकार का मानना है कि स्टारलिंक जैसी विदेशी संचार सेवाएं राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के विरुद्ध हो सकती हैं। हालांकि, भारत के कुछ हिस्सों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी बनी हुई है, जहां स्टारलिंक जैसी सेवाएं फायदेमंद साबित हो सकती हैं।