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मुथांगा बेदखली आदिवासी आंदोलन को कुचलने की साजिश थी: गीतानंदन
केरल के वरिष्ठ राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता गीतानंदन ने मुथांगा बेदखली को आदिवासी आंदोलन को दबाने का प्रयास बताया है। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई सुनियोजित थी और वंचित समुदायों को हाशिये पर रखने की नीति का हिस्सा थी।
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केरल के प्रभावशाली राजनेता गीतानंदन ने मुथांगा में की गई बेदखली की कार्रवाई को आदिवासी अधिकार आंदोलन को दबाने की एक सुनियोजित रणनीति बताया है। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल भूमि विवाद नहीं थी, बल्कि वंचित जनजातीय समुदायों को उनके न्यायसंगत अधिकारों से वंचित करने की व्यापक नीति का अंग था।
गीतानंदन के अनुसार, मुथांगा में की गई कार्रवाई आदिवासियों के आंदोलन को कमजोर करने और उनके प्रतिरोध को तोड़ने के लिए डिज़ाइन की गई थी। उन्होंने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि यह सामाजिक न्याय और समानता के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है। गीतानंदन का मानना है कि ऐसी नीतियां सामाजिक विभाजन को गहरा करती हैं।
वे आदिवासी अधिकारों के मुद्दे पर दशकों से सक्रिय हैं और उन्होंने कहा कि मुथांगा की घटना का प्रभाव न केवल केरल बल्कि पूरे क्षेत्र के आदिवासी समुदायों पर पड़ा है। गीतानंदन ने जोर देकर कहा कि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना राष्ट्र की जिम्मेदारी है।