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वेंकैया नायडु ने ओंगोल पशु नस्ल के संरक्षण का आह्वान किया
पूर्व उपराष्ट्रपति ने 'ओंगोल उत्सवम्' में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेते हुए इन देशी मवेशियों को संरक्षित करने की जनता की जिम्मेदारी को रेखांकित किया। उन्होंने चेताया कि विदेशी देश नई नस्लें विकसित करने के लिए भारतीय पशु नस्लों का दुरुपयोग कर रहे हैं।
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पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडु ने ओंगोल मवेशियों की विरासत को संजोए रखने के महत्व पर जोर दिया है। 'ओंगोल उत्सवम्' समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर उन्होंने इस प्रसिद्ध पशु नस्ल के संरक्षण में सार्वजनिक भागीदारी की अपील की।
नायडु ने अपने संबोधन में यह चिंता व्यक्त की कि विभिन्न विदेशी देश देशी पशु नस्लों को अपने यहां ले जाकर नई और बेहतर नस्लें विकसित कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में भारतीय कृषि की जैव विविधता और आनुवंशिक संसाधनों का नुकसान हो रहा है।
ओंगोल पशु नस्ल भारत, विशेषकर आंध्र प्रदेश में पाली जाने वाली एक महत्वपूर्ण देशी नस्ल है। इसकी शारीरिक क्षमता, कठोर परिस्थितियों में सहन शीलता और उच्च उत्पादकता के लिए यह विश्व प्रसिद्ध है।
पूर्व उपराष्ट्रपति का मानना है कि इस महत्वपूर्ण आनुवंशिक संपदा को बचाए रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक सदस्य को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कृषकों और पशुपालकों से इन नस्लों की देशी प्रजातियों को बनाए रखने का आह्वान किया।