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नालको ने दुर्लभ धातुओं को निकालने के लिए पायलट प्लांट शुरू किया
राष्ट्रीय एल्यूमिनियम कंपनी ने औद्योगिक अवशेषों से मूल्यवान उत्पाद प्राप्त करने के लिए एक नई सुविधा का शुभारंभ किया है। यह संयंत्र फेरो-टाइटेनियम मिश्रधातु, धातु लोहा और स्कैंडियम जैसे दुर्लभ पृथ्वी तत्वों को पुनः प्राप्त करने पर केंद्रित है।
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नालको ने भारतीय खनिज और धातु प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएमएमटी) और कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (केआईआईटी) के सहयोग से एक पायलट प्लांट का शुभारंभ किया है। यह सुविधा औद्योगिक अवशेषों से मूल्यवान धातु तत्वों को निकालने की प्रक्रिया का परीक्षण करेगी।
इस पायलट प्लांट का प्राथमिक उद्देश्य फेरो-टाइटेनियम मिश्रधातु, शुद्ध धातु लोहा और स्कैंडियम सहित दुर्लभ पृथ्वी तत्वों को औद्योगिक अवशिष्ट से पुनः प्राप्त करना है। यह तकनीक न केवल अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करेगी बल्कि मूल्यवान संसाधनों के पुनः उपयोग को भी प्रोत्साहित करेगी।
दुर्लभ पृथ्वी तत्व विभिन्न उच्च-तकनीक अनुप्रयोगों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा उपकरण शामिल हैं। इस परियोजना के माध्यम से नालको घरेलू स्तर पर इन महत्वपूर्ण सामग्रियों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
यह पहल भारत की सर्कुलर इकोनॉमी नीति के अनुरूप है और औद्योगिक अपशिष्ट से मूल्य निष्कर्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। तीनों संस्थानों का यह सहयोग भारतीय धातु उद्योग में तकनीकी नवाचार को आगे बढ़ाने का प्रयास है।