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ताइहू झील में नैनोबबल तकनीक से जहरीले शैवाल में 90 प्रतिशत की गिरावट
चीन ने ताइहू झील के 3,300 वर्ग मीटर के क्षेत्र में नैनोबबल तकनीक का परीक्षण किया, जिससे 20 दिनों में क्लोरोफिल-ए स्तर में उल्लेखनीय कमी आई। यह अभिनव पद्धति जल की गुणवत्ता में सुधार करते हुए जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने का एक नया समाधान प्रदान करती है।
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चीन में ताइहू झील में किए गए परीक्षण से जलीय प्रदूषण से निपटने के लिए एक अत्यधुनिक तकनीक का उदय हुआ है। नैनोबबल प्रौद्योलॉजी का उपयोग करके शोधकर्ताओं ने झील के एक विस्तृत हिस्से में विषाक्त साइनोबैक्टीरिया को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त की है। परीक्षण अवधि के दौरान क्लोरोफिल-ए का स्तर 90 प्रतिशत तक कम हुआ, जो इस प्रणाली की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
यह तकनीक कैविटेशन और ओजोन नैनोबबल को एकीकृत करके काम करती है। इस पद्धति के माध्यम से न केवल पानी की गुणवत्ता में सुधार होता है, बल्कि घुली हुई ऑक्सीजन के स्तर में भी वृद्धि होती है। यह दोहरा लाभ जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ताइहू झील जैसे बड़े जलाशयों में शैवाल का प्रस्फुटन एक गंभीर समस्या है जो जल संसाधनों को प्रभावित करता है। इस नई तकनीक के सफल परीक्षण से भारत सहित अन्य एशियाई देशों में जलीय संरक्षण के लिए एक आशाजनक विकल्प का द्वार खुल गया है। बड़े पैमाने पर पारिस्थितिकीय पुनरुद्धार के लिए यह समाधान आने वाले समय में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।