LSN News › India

World · India Bureau

नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान की परंपरा, जानिए इसका महत्व

8 नवंबर को मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले तिल के तेल से स्नान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस रीति-रिवाज का विशेष महत्व है।

LSN India · 4 November 2026

नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान की परंपरा, जानिए इसका महत्व

नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है, इस बार 8 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन सुबह जल्दी अभ्यंग स्नान किया जाता है, जिसमें शरीर पर तिल का तेल लगाकर नहा जाता है।

हिंदू धर्म की परंपराओं के अनुसार, सूर्योदय से पहले इस स्नान को करने का विशेष महत्व बताया जाता है। माना जाता है कि इस दिन यह रीति-रिवाज करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और अलक्ष्मी नामक नकारात्मक शक्ति से मुक्ति मिलती है।

दिवाली के त्योहार से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी पर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का पालन किया जाता है। तिल का तेल लगाकर स्नान करने की प्रथा को आयुर्वेद के दृष्टिकोण से भी लाभकारी माना जाता है।

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इस दिन को अलग-अलग नामों से जाना जाता है, लेकिन इसका सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व सर्वत्र समान है। परिवार के सभी सदस्यों द्वारा इस परंपरा का पालन किया जाता है।