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NASA के JPL में भारत-अमेरिका को जोड़ता अंतरिक्ष तकनीक विकास
नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में सूक्ष्म सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विकास होता है जो अंतरिक्ष यानों के लिए अत्यंत कठोर परिस्थितियों में विश्वसनीय प्रदर्शन करते हैं।
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अमेरिका की नासा एजेंसी की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अनुसंधान केंद्र है। यहां की माइक्रोडिवाइसेस लेबोरेटरी में वैज्ञानिक अत्यधिक छोटे आकार के सेंसर और विद्युत घटकों का निर्माण करते हैं जो अंतरिक्ष यानों और उपग्रहों में उपयोग किए जाते हैं।
इन उपकरणों को अंतरिक्ष के चरम वातावरण में कार्य करना पड़ता है। तापमान में अत्यधिक उतार-चढ़ाव, विकिरण, और निर्वात जैसी कठोर परिस्थितियों में भी ये उपकरण विश्वसनीय ढंग से काम करते हैं। विशेषकर, अंतरिक्ष मिशन में बार-बार मरम्मत करना संभव नहीं होता, इसलिए उपकरणों की गुणवत्ता और स्थायित्व अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह अनुसंधान कार्य भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। दोनों देश मिलकर अंतरिक्ष अन्वेषण के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में प्रतिबद्ध हैं। इसी सहयोग के माध्यम से दोनों देशों की वैज्ञानिक क्षमता को बल मिलता है।
JPL की उन्नत तकनीकें विश्वभर के अंतरिक्ष कार्यक्रमों में उपयोग होती हैं। भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) भी अपने मिशनों के लिए ऐसी अत्याधुनिक तकनीकों का लाभ उठाता है। इस तरह के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से अंतरिक्ष विज्ञान का क्षेत्र और भी समृद्ध होता है।