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राष्ट्र और धर्म एक-दूसरे पर निर्भर हैं: मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा विश्व के लिए आवश्यक है। उन्होंने इस ज्ञान को संरक्षित करने वालों की सेवा को मानवता की सेवा बताया।

LSN India · 3 October 2026

राष्ट्र और धर्म एक-दूसरे पर निर्भर हैं: मोहन भागवत

विहार सेवा सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने राष्ट्र और धर्म के बीच गहरा संबंध रेखांकित किया। भागवत के अनुसार ये दोनों एक-दूसरे पर निर्भर हैं और एक-दूसरे के पूरक हैं।

भागवत ने भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि वेदों से लेकर गुरु ग्रंथ साहिब तक भारत की यह परंपरा वर्तमान समय में विश्व के लिए अत्यंत आवश्यक और प्रासंगिक है।

आरएसएस प्रमुख ने इस ज्ञान परंपरा के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। उनके अनुसार, इस ज्ञान को आगे बढ़ाने वाले और इसकी रक्षा करने वाले लोगों की सेवा असल में मानवता की सेवा है।

भागवत के विचारों से स्पष्ट होता है कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सुरक्षित रखना राष्ट्र के विकास के लिए कितना महत्वपूर्ण है।