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राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने डॉक्टरों के लिए यूनीक आईडी का प्रस्ताव रखा
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने चिकित्सकों के लिए एक यूनीक आइडेंटिफिकेशन (यूआईडी) प्रणाली की शुरुआत का प्रस्ताव दिया है। यह व्यवस्था डॉक्टरों को देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में अभ्यास करने के लिए नए पंजीकरण से मुक्त करेगी।
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राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने चिकित्सा पेशेवरों के लिए एक समन्वित राष्ट्रीय पहचान प्रणाली स्थापित करने का सुझाव दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत एक बार राज्य चिकित्सा परिषद से पंजीकरण प्राप्त होने के बाद और नैतिकता तथा चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड द्वारा यूआईडी आवंटित होने के बाद, डॉक्टरों को किसी अन्य राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में अभ्यास करने के लिए अतिरिक्त पंजीकरण या अलग लाइसेंस की आवश्यकता नहीं रहेगी।
यह प्रस्तावित प्रणाली देश में चिकित्सा पेशेवरों की गतिशीलता को बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवा वितरण को सुव्यवस्थित करने का उद्देश्य रखती है। वर्तमान में डॉक्टरों को एक राज्य से दूसरे राज्य में अभ्यास शुरू करने के लिए प्रत्येक स्थान पर अलग से पंजीकरण कराना पड़ता है, जिससे प्रशासनिक बोझ और समय में वृद्धि होती है।
आयोग का यह कदम राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस व्यवस्था के लागू होने से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ने की संभावना है।