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हाईजैकिंग रोधी उपाय: आपातकालीन स्थिति में विमान गिराने का अधिकार
9/11 के बाद से भारत, अमेरिका और इजरायल जैसे देश हाईजैक विमानों को रोकने के लिए नियमित अभ्यास करते हैं। सभी विकल्प विफल होने पर सरकारें बड़ी त्रासदी से बचने के लिए विमान को गिराने का आदेश दे सकती हैं।
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विश्व स्तर पर विमानन सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल यह है कि आतंकवादी हमले की स्थिति में सरकारें हाईजैक किए गए विमान को गिराने का आदेश दे सकती हैं। यह कदम केवल तभी उठाया जाता है जब विमान को आत्मघाती हमले का साधन बनाए जाने का गंभीर संकट हो।
9/11 के सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों के बाद से राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र में यह व्यवस्था और कठोर हुई है। भारत, अमेरिका और इजरायल सहित कई देश नियमित रूप से ऐसी परिस्थितियों में सैन्य और असैनिक विमानन अधिकारियों को प्रशिक्षण देते हैं।
इस प्रोटोकॉल के तहत सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्व को किसी संभावित आपातकाल में तुरंत निर्णय लेना पड़ सकता है। ऐसी परिस्थिति में प्रधानमंत्री या राष्ट्रीय सुरक्षा समिति विमान को गिराने का आदेश दे सकती है ताकि जमीन पर किसी बड़े हमले को रोका जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय केवल तभी लिया जाता है जब विमान पर नियंत्रण खो गया हो, संचार विफल हो गई हो और विमान किसी महत्वपूर्ण संरचना की ओर बढ़ रहा हो। राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए सतत तैयारी रखती हैं।