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1987 में फोर्ट पेक जनजातियों ने 5,800 एकड़ में 100 से अधिक बाइसन लौटाए
अमेरिकी जनजातियों के संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर 1987 में आया जब फोर्ट पेक जनजातियों ने विशाल भूभाग पर बाइसन की आबादी को पुनः स्थापित किया। यह पहल वन्यजीव संरक्षण और स्वदेशी भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में एक अग्रणी प्रयोग साबित हुआ।
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फोर्ट पेक भारतीय जनजातियों ने 1987 में अपने पारंपरिक भूभाग पर बाइसन पुनः परिचय कार्यक्रम शुरू किया। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 100 से अधिक बाइसन को 5,800 एकड़ के संरक्षित क्षेत्र में छोड़ा गया था। यह कदम जनजातीय समुदायों द्वारा अपनी ऐतिहासिक विरासत को पुनः जीवंत करने का एक सचेत प्रयास था।
बाइसन, जो कभी अमेरिकी महाद्वेश पर लाखों की संख्या में घूमते थे, 19वीं शताब्दी में विलुप्त होने के कगार पर आ गए थे। इस प्रजाति की पुनः स्थापना पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने और स्वदेशी संस्कृति से जुड़ाव को मजबूत करने दोनों के लिए आवश्यक मानी जाती थी।
फोर्ट पेक जनजातियों का यह कार्यक्रम वन्यजीव संरक्षण में एक सफल मॉडल के रूप में स्वीकृत हुआ। इस परियोजना ने भारतीय जनजातियों की पारिस्थितिक ज्ञान और स्वदेशी भूमि प्रबंधन की क्षमता को प्रदर्शित किया। आने वाले वर्षों में यह पहल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हुई।