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लोएस पठार पर वनरोपण: 18 साल बाद प्राकृतिक वन बेहतर मिट्टी नमी बनाए रखते हैं

चीन के लोएस पठार पर किए गए अध्ययन से पता चलता है कि प्राकृतिक रूप से विकसित वन, रोपित वनों की तुलना में मिट्टी में 8 प्रतिशत अधिक नमी को बनाए रखते हैं। इस शोध में द्वितीयक प्राकृतिक वनों की जल संरक्षण क्षमता पारंपरिक वनरोपण से बेहतर पाई गई।

LSN India · 10 September 2026

लोएस पठार पर वनरोपण: 18 साल बाद प्राकृतिक वन बेहतर मिट्टी नमी बनाए रखते हैं

चीन के लोएस पठार पर किए गए एक दीर्घकालीन अध्ययन में प्राकृतिक वन और कृत्रिम रूप से रोपित वनों के बीच महत्वपूर्ण अंतर उजागर हुए हैं। अठारह वर्षों तक चलने वाले इस शोध से पता चलता है कि प्राकृतिक द्वितीयक वन रोपित वनों की तुलना में मिट्टी में 8 प्रतिशत अधिक नमी को सुरक्षित रखते हैं।

शोध के आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि प्राकृतिक वनों की मिट्टी की संरचना बेहतर है और उनमें जल अवशोषण की क्षमता अधिक होती है। इसके विपरीत, कृत्रिम रूप से रोपित वनों में अठारह वर्षों की अवधि में मिट्टी की नमी में निरंतर गिरावट देखी गई है।

मिट्टी के जल संरक्षण में यह अंतर प्राकृतिक पुनर्जनन की हाइड्रोलॉजिकल श्रेष्ठता को प्रदर्शित करता है। प्राकृतिक वन न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं बल्कि जलभृत संरक्षण में भी अधिक प्रभावी साबित होते हैं।

यह अध्ययन वनों के पुनरुद्धार से संबंधित नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जल संसाधनों के संरक्षण के लिए प्राकृतिक वन पुनर्जनन की रणनीति अधिक कारगर साबित हो सकती है।