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नवरात्रि 2026: चतुर्थी को पहनें पीला रंग, जानें देवी कुष्मांडा का महत्व
नवरात्रि के चौथे दिन को चतुर्थी तिथि कहा जाता है। इस दिन देवी कुष्मांडा की पूजा की जाती है और पीले रंग का विशेष महत्व माना जाता है।
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नवरात्रि के पवित्र नौ दिनों में चौथे दिन को अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन को चतुर्थी तिथि के नाम से जाना जाता है और इसी दिन देवी कुष्मांडा की आराधना की परंपरा है। माना जाता है कि देवी कुष्मांडा ब्रह्मांड की रचयिता हैं और उनका नाम संस्कृत भाषा से लिया गया है।
नवरात्रि के चौथे दिन पीले रंग का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पीला रंग पहनने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और मन को प्रसन्न रखने में सहायता मिलती है। भक्तगण इस दिन पीले फूल, पीले कपड़े और पीले खाद्य पदार्थों का प्रयोग करते हैं।
देवी कुष्मांडा को ब्रह्मांड की शक्ति माना जाता है और उनके आशीर्वाद से स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि जब सृष्टि का निर्माण नहीं हुआ था, तब देवी कुष्मांडा ने अपनी दिव्य शक्ति से ब्रह्मांड की रचना की थी। नवरात्रि के इस दिन व्रत रखने और देवी को प्रणाम करने की प्रथा है।
भारत भर में लाखों श्रद्धालु नवरात्रि के दौरान देवी की पूजा करते हैं। चतुर्थी की तिथि पर मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखी जाती है और घरों में भी देवी कुष्मांडा के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है। इस पवित्र त्योहार को समस्त बुराइयों के विनाश और कल्याण का प्रतीक माना जाता है।