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नवरात्र सप्तमी: मां कालरात्रि की पूजा आज, जानें विधि और परंपरा
नवरात्र पर्व के सातवें दिन देशभर में मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। यह दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक महत्व रखता है और विशेष पूजन विधि का पालन किया जाता है।
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नवरात्र के सातवें दिन को सप्तमी कहा जाता है, जिस दिन देवी के सातवें रूप मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। मां कालरात्रि को अंधकार और बुराई का नाश करने वाली शक्ति के रूप में पूजा जाता है। इस दिन का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भारतीय परंपरा में माना जाता है।
मां कालरात्रि की पूजा में सुबह स्नान के बाद घर की पूजा स्थल को साफ किया जाता है। देवी की प्रतिमा को फूलों से सजाया जाता है और धूप-दीप जलाकर आरती की जाती है। भक्त प्रार्थना करते हैं और देवी को खीर, हलवा, पूरी जैसे पारंपरिक भोग का प्रसाद अर्पित करते हैं। इस दिन के लिए काले और सफेद रंग को विशेष माना जाता है।
नवरात्र के सातवें दिन की पूजा में देवी को समर्पित मंत्रों का जाप किया जाता है। भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और पारंपरिक आरती में भाग लेते हैं। मां कालरात्रि का मंदिर दर्शन इस दिन विशेष माना जाता है।
सप्तमी की पूजा परिवार के साथ की जाती है और इसे बुरी शक्तियों के विनाश का प्रतीक माना जाता है। पूरे भारत में इस दिन भक्त विभिन्न मंदिरों में मां की पूजा करते हैं और सामूहिक रूप से भोग का वितरण किया जाता है।