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नवरात्रि व्रत पारण: अष्टमी या नवमी, जानें सही समय और विधि
नवरात्रि के नौ दिनों में व्रत रखने वाले भक्तों के लिए व्रत खोलने का सही समय और विधि जानना आवश्यक है। तिथि के आधार पर पारण का समय निर्धारित होता है, जिसे समझना महत्वपूर्ण है।
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नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा को समर्पित नौ दिवसीय उत्सव है, जिसमें लाखों भक्त व्रत रखकर देवी की पूजा-अर्चना करते हैं। इन नौ दिनों में आस्था और भक्ति का माहौल होता है, लेकिन व्रत को सही तरीके से समाप्त करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
व्रत का पारण अष्टमी या नवमी को किया जाए, यह सवाल कई भक्तों के मन में उठता है। पंचांग और तिथि के अनुसार, जिस दिन अष्टमी या नवमी तिथि का अंत होता है, उसी दिन व्रत को तोड़ा जाता है। यदि अष्टमी तिथि दिन भर बनी रहती है, तो अष्टमी को ही पारण किया जाता है। इसी प्रकार नवमी की स्थिति में नवमी को पारण का समय निर्धारित होता है।
व्रत पारण की विधि के अनुसार, पहले मां दुर्गा को भोग लगाया जाता है। इसके बाद व्रत को रखने वाले व्यक्ति को हल्का भोजन करना चाहिए। खीर, पूरी, हलवा या फल का सेवन पारण के लिए उपयुक्त माना जाता है। व्रत के दौरान जमा हुई कमजोरी को दूर करने के लिए पौष्टिक भोजन लेना आवश्यक है।
धार्मिक दृष्टि से, सूर्यास्त के बाद व्रत को तोड़ना अधिक शुभ माना जाता है। कुछ परंपराओं में व्रत को भोजन से पहले जल से तोड़ा जाता है। भक्तों को चाहिए कि वह स्थानीय पंडित या धार्मिक मार्गदर्शक से अपने क्षेत्र की परंपरा के अनुसार व्रत पारण का सही समय जानें।