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आरबीआई के प्रस्तावित प्रतिबंधों को नरम करने की मांग एनबीएफसी निकाय ने की

एफआईडीसी ने चेतावनी दी है कि चुकाई गई रकम को दोबारा इस्तेमाल करने पर व्यापक प्रतिबंध से उधार लेने की लागत बढ़ेगी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रभावित करेगा।

LSN India · 28 August 2026

आरबीआई के प्रस्तावित प्रतिबंधों को नरम करने की मांग एनबीएफसी निकाय ने की

भारतीय गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का शीर्ष संगठन भारतीय रिजर्व बैंक से रिवॉल्विंग क्रेडिट उत्पादों पर प्रस्तावित प्रतिबंधों को नरम करने की मांग कर रहा है। फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस डेवलपमेंट काउंसिल (एफआईडीसी) का कहना है कि चुकाई गई मूलधन को दोबारा इस्तेमाल करने पर खाका प्रतिबंध लागू करने से ऋण बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

एनबीएफसी निकाय के अनुसार, ऐसे प्रतिबंध से काम करने वाली पूंजी की व्यवस्था, व्यक्तिगत ऋण और अन्य लचीली ऋण सुविधाएं प्रभावित होंगी जिन पर छोटे और मझोले कारोबार तथा आम जनता पर निर्भर करते हैं। इन उत्पादों में उधार लेने वाले वापस चुकाई गई राशि को दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं।

एफआईडीसी ने बताया कि यह प्रस्ताव वित्तीय समावेशन को बाधित करेगा और कर्ज लेने वाले परिवारों एवं व्यवसायों के लिए ऋण सुविधा कम सुलभ बना देगा। इसके अलावा, उधार लेने की कीमत में भी बढ़ोतरी हो सकती है क्योंकि एनबीएफसी को अपनी परिचालन लागत को लेकर नई रणनीति बनानी पड़ेगी।

संगठन ने आरबीआई से विनती की है कि ऐसे कदम उठाते समय क्षेत्र की विविध जरूरतों और बाजार की परिस्थितियों पर गौर किया जाए। एफआईडीसी का तर्क है कि रिवॉल्विंग क्रेडिट उत्पादों को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाय एक संतुलित नियामकीय दृष्टिकोण अपनाना बेहतर होगा।